अशोक कुमार को पांच साल से इंतजार था. पांच साल पहले वॉकवाटर प्रोडक्शंस ने उनके साथ एक डॉक्यूमेंट साइन किया था. इसके मुताबिक अशोक कुमार के पिता और हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद पर फिल्म बननी थी. अब वो पांच साल खत्म हो रहे हैं. इसी बीच अशोक कुमार को खबर मिलती है कि ये फिल्म अब महेंद्र सिंह धोनी बना रहे हैं. फिल्म प्रोड्यूसर में धोनी के साथ करण जौहर का भी नाम है.

भोपाल से अशोक कुमार ने बताया कि उन्हें इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है, ‘मुझे किसी ने कुछ नहीं बताया है. मुझे लगता है कि वॉकवाटर प्रोडक्शंस से फिल्म के राइट्स धोनी की कंपनी ने खरीद लिए होंगे. मुझसे तो वो पांच साल पहले साइन करवा गए थे.’

1975 की विश्व कप विजेता हॉकी टीम के सदस्य रहे अशोक कुमार को इस बात का तो मलाल है कि उन्हें जानकारी नहीं है. लेकिन उन्हें खुशी है कि महेंद्र सिंह धोनी की कंपनी फिल्म बनाएगी, ‘हम कई साल से इंतजार कर रहे हैं कि दद्दा पर फिल्म बने. ऐसा हो नहीं पा रहा था. मेरे पास और भी लगातार प्रस्ताव आ रहे थे. लेकिन मैं एक कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कर चुका था. इसलिए उससे बाहर निकलने का ऑप्शन  भी नहीं था. ऐसे में मैं इंतजार के अलावा और कुछ कर नहीं सकता था.’

धोनी के फिल्म बनाने से अशोक कुमार खुश
अशोक कुमार ने आगे कहा, ‘मुझे इस खबर से दिली खुशी मिली है. मेरे लिए अब ये अहम नहीं रह गया है कि मेरी जानकारी में बातें हैं या नहीं. मुझे लगता है कि मेरे जीते जी दद्दा को भारत रत्न मिल जाए. उन पर फिल्म बन जाए, ताकि हमेशा-हमेशा लोग उनके बारे में जान सकें. मुझे लगता है कि धोनी का फिल्म बनाना दद्दा के साथ न्याय कर सकेगा. वो खुद खेलों से जुड़े हैं. ऐसे में वो फिल्म में खास रुचि लेंगे.’

दिलचस्प है कि धोनी ने रांची में क्रिकेट और फुटबॉल के अलावा हॉकी में भी हाथ आजमाया है. वो दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में अभ्यास करते रहे हैं. वहां धोनी अक्सर हॉकी के बारे में भी जानकारी लेते रहे हैं. खासतौर पर तब, जब उस स्टेडियम में हॉकी कैंप चल रहा हो.

पिछले कुछ समय में कई खिलाड़ियों पर आई है बायोपिक
इस वक्त वैसे भी खेलों पर बायोपिक का दौर चल रहा है. खुद महेंद्र सिंह धोनी पर बायोपिक बनी है. इससे पहले मैरी कॉम, पान सिंह तोमर, मिल्खा सिंह, अजहरुद्दीन जैसे खिलाड़ियों पर बायोपिक बन चुकी है. फिल्म दंगल गीता और बबिता फोगाट के पिता महावीर फोगाट की जिंदगी पर थी. बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल और पीवी सिंधु पर भी बायोपिक बनाए जाने की योजना है. ऐसे में उस खिलाड़ी की बायोपिक पर बात होना जरूरी है, जिसने गुलाम भारत को खेल की दुनिया में पहचान दिलाई थी.

मेजर ध्यानचंद की कप्तानी में 1936 में भारत ने 15 अगस्त के दिन ही ओलिंपिक गोल्ड जीता था. हालांकि मैच 14 अगस्त को होना था, जो बारिश की वजह से टाल दिया गया. उस रात भारतीय टीम ने अंधेरे में तिरंगा फहराया था और कहा जाता है कि हर खिलाड़ी जेब में तिरंगा रखकर खेला था. पिछले काफी समय से अशोक कुमार इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न मिले. इसमें अब तक उन्हें नाकामी मिली है. फिल्म के मुद्दे पर भी उन्हें लगातार निराशा मिली है. वो कहते हैं, ‘चलिए, अगर फिल्म बन रही है, तो कम से कम राहत की बात है.’