व्यापार बढ़ाओ-बिहार बढ़ाओ: बस थोड़ी सी पहल की जरूरत

बिहार बदल रहा है, विकास पथ पर तेजी से अग्रसर है। पिछडा़ कहा जाने वाला यह सूबा उद्यम क्षेत्र में बीते एक दशक में 8.4 और सेवा क्षेत्र में 10 फीसदी की दर से विकास कर रहा है। पिछले एक साल से शराबबंदी का सकारात्मक असर हुआ है। बचत की प्रवृत्ति यहां के लोगों में बढ़ी है। जीवन स्तर में भी सुधार आने लगा है।

करीब 12 करोड़ की आबादी वाले इस प्रदेश में एक बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के साथ ही विशाल मानव पूंजी भी है। जरूरत है तो बस थोड़ी सी हमारी और आपकी पहल की। फिर निश्चित रूप से व्यापार के साथ-साथ हमारा बिहार भी बढ़ेगा और तेज…और तेज…। बात आगे बढ़ने की हो तो आइए एक नजर डालें कि आखिर व्यापार और विकास की दौउ़ में कहां है बिहार।

निवेश की जरूरत
-19 वे नंबर पर रहा था बिहार पिछले साल निवेश के मामले में कुल 21 राज्यों में से।
-8.6% आबादी के साथ देश की कुल जनसंख्या के मामले में तीसरे नंबर पर है बिहार।

प्रति व्यक्ति आय
12.2% वृद्धि अनुमानों की नई श्रृंखला में वर्तमान मूल्य पर यह 12.2 फीसदी है। ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17’ के मुताबिक वर्ष 2015-16 में बिहार में प्रति व्यक्ति आय 2011 के स्थिर मूल्य पर 29,190 और वर्तमान मूल्य पर 39,964 है।

सबसे तेज विकास- 5%
‘आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17’ के मुताबिक विकास के विभिन्न आयामों की समीक्षा में यह तथ्य प्रमुखता से उभरकर आया कि बिहार देश में पांच सबसे तेज विकास दर वाला प्रदेश है।

शहरीकरण में पीछे
शहरीकरण के मामले में बिहार काफी पीछे है। शहरीकरण का राष्ट्रीय औसत 31.2 फीसदी है। इसकी तुलना में बिहार का औसत 11.3 ही है, यानी यहां की मात्र 11 फीसदी आबादी ही शहरों में रहती है।

जीएसडीपी
बिहार के लिए सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसपीडी) की मध्यकालिक वृद्धि दर 7.6 फीसदी थी, जबकि राष्ट्रीय अर्थवयवस्था के लिए यह 6.8 फीसदी थी। वर्तमान मूल्य पर यह आंकड़ा 12 से 13% तक पहुंच जाएगा।

प्रति व्यक्ति बिजली
बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 258 यूनिट है, जबकि राष्ट्रीय औसत 1075 है। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का काम लगभग पूरा हो चुका है। कृषि के लिए अलग फीडर बनाने का काम शुरू हो गया है। मार्च 2018 तक 50 लाख नए कनेक्शन देने के लिए हर घर बिजली मुहिम शुरू की गई है। 2005 में बिहार में बिजली उत्पादन शून्य था जबकि 2018 तक 2650 मेगावाट राज्य का अपना बिजली उत्पादन होगा।

व्यावसायिक उड़ान
बिहार में सिर्फ पटना से व्यावसायिक उड़ान है। प्रतिदिन 28 आगमन और 28 प्रस्थान। 2010 से 2016 के बीच विमान आगमन में 10.70, यात्रियों में 11.29, माल ढुलाई में 10.52% की वृद्धि हुई है।

उद्यम और सेवा क्षेत्र में भी विकास
बिहार में उद्यम क्षेत्र में बीते एक दशक में 8.4 और सेवा क्षेत्र में 10 फीसदी की दर से विकास किया है। बावजूद इसके देश के कुल कारखानों में बिहार के कारखानों का हिस्सा मात्र 1.52 फीसदी है, जबकि आबादी 8 फीसदी से अधिक है। बिहार में सभी उद्योगों की स्थिर पूंजी का आकार (8.04 हजार करोड़ रुपये) देश के संबंधित आंकड़े (2,373.72 हजार करोड़ रुपये) की मात्र 0.34 फीसदी है। अन्य सूचकों में बिहार का हिस्सा इस प्रकार है-कार्यशील पूंजी (0.58 फीसदी), नियोजित व्यक्ति (0.84 फीसदी), उत्पाद मूल्य (0.84 फीसदी) और निवल मूल्यवर्धन (0.58 फीसदी)।

शहरीकरण में पीछे
शहरीकरण के मामले में बिहार काफी पीछे है। शहरीकरण का राष्ट्रीय औसत 31.2 फीसदी है। इसकी तुलना में बिहार का औसत 11.3 ही है, यानी यहां की मात्र 11 फीसदी आबादी ही शहरों में रहती है जबकि देश की कुल आबादी की 8.6 फीसदी बिहार में रहती है। बिहार में प्रति 15000 की आबादी पर एक बैंक शाखा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 11,750 की आबादी पर एक बैंक शाखा है। जून, 2016 तक देश की कुल बैंक शाखाओं (1 लाख 25 हजार 863) में बिहार का हिस्सा मात्र 4.8 फीसदी (6015) था जबकि देश के तीसरे बड़े राज्य की आबादी 8.6 फीसदी है।

साख-जमा अनुपात
बिहार के बैंकों का साख-जमा अनुपात 43.90 फीसदी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 68 फीसदी है।

बिहार में रेलमार्ग
देश के रेलमार्गो में बिहार का हिस्सा 5.5 प्रतिशत है। प्रति 1000 वर्ग किमी पर रेलमार्ग का घनत्व बिहार में 38.6 किमी और भारत के स्तर पर 20 किमी है।