Amarnath attack
मरने वाले सभी श्रद्धालु गुजरात के रहने वाले हैं। बस का नंबर जीजे 09 जेड 9976 है। बस में 17 यात्री सवार थे। श्राइन बोर्ड में रजिस्टर्ड नहीं थी श्रद्धालुओं की बस

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सोमवार रात अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर हुए आतंकी हमले में 5 महिलाओं समेत सात लोगों की मौत हो गई जबकि 32 घायल हुए। नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, विहिप और जेकेएनपीपी सहित कई राजनीतिक दलों ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के चलते आज शहर में बंद का आह्वान किया है। विहिप प्रवक्ता राजेश कुमार ने कहा कि हमने अनंतनाग में आतंकी हमले में यात्रियों की मौत के विरोध में आज जम्मू बंद का आह्वान किया है। कांग्रेस प्रवक्ता रवींद्र शर्मा ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि पार्टी बंद का समर्थन करती है। इनके अलावा जेकेएनपीपी और एनसी ने भी बंद का आह्वान किया।

अलगाववादी नेताओं ने अमरनाथ श्रद्धालुओं पर हमले की निंदा की

अलगाववादी नेताओं ने रात अनंतनाग जिले में अमरनाथ श्रद्धालुओं पर आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए कहा कि घटना कश्मीरी संस्कार के खिलाफ है। एक संयुक्त बयान में अलगाववादी हुर्रियत नेता सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासिन मलिक ने सात अमरनाथ यात्रियों के मारे जाने पर शोक प्रकट किया। इसमें कहा गया, घटना कश्मीरी परंपरा के बिल्कुल विपरीत है। अमरनाथ यात्रा सदियों से शांतिपूर्ण तरीके से चलती रही है और यह सालाना आयोजन और रहेगा।

बाइक पर आए थे आतंकी

जानकारी के मुताबिक दो हमलावर बाइक पर आए थे। आतंकवादियों ने पहले पुलिस की बख्तरबंद गाड़ी पर हमला किया। जब पुलिस ने जवाबी गोलीबारी की तो आतंकवादी अंधाधुंध गोलियां चलाते हुए फरार हो गए। अमरनाथ यात्रियों से भरी एक बस सोनमर्ग से आ रही थी। श्रद्धालु अमरनाथ गुफा के दर्शन करके वापस लौट रहे थे।  इसी दौरान आतंकियों ने बस पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। हमले के बाद एहतियात के तौर पर जम्मू-श्रीनगर हाईवे को बंद कर दिया गया है।

गुजरात की है बस

मरने वाले सभी  श्रद्धालु गुजरात के रहने वाले हैं। बस का नंबर जीजे 09 जेड 9976 है। बस में 17 यात्री सवार थे। श्राइन बोर्ड में रजिस्टर्ड नहीं थी श्रद्धालुओं की बस

पुलिस ने दावा किया कि बस चालक ने तीर्थयात्रा के नियमों का उल्लंघन किया क्योंकि रात सात बजे के बाद किसी यात्रा वाहन को राजमार्ग पर चलने की अनुमति नहीं होती।

सीआरपीएफ का काफिला था निशाने पर

पुलिस का कहना है कि आतंकियों के निशाने पर अमरनाथ यात्री नहीं थे। हमला सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाकर किया गया। लेकिन बस के साथ कोई सुरक्षा काफिला नहीं था।

सात अगस्त तक चलेगी यात्रा

इस बार अमरनाथ यात्रा 29 जून को आरंभ हुई थी और 7 अगस्त तक चलेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीर्थयात्रा के शांतिपूर्ण संचालन के लिए राज्य सरकार की मदद हेतु 40,000 अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती की है।  सुरक्षाबल श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा, ड्रोन, बुलेटप्रूफ मोबाइल बंकर सहित अन्य उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बता दें किसुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही अमरनाथ यात्रा पर आतंकी खतरे को लेकर आगाह किया था।

अमरनाथ यात्रियों पर पहले भी हमले

2000 – 1 अगस्त  :  आतंकियों ने पहलगाम में बेस कैंप पर हमला किया था जिसमें श्रद्धालु और स्थानीय लोग समेत 30 लोग मारे गए थे
2001 – 23 जुलाई : अमरनाथ यात्रियों के शिविर पर हमले में 13 श्रद्धालु और पुलिसकर्मी मारे गए।
2002 – 30 जुलाई : दो अमरनाथ यात्री ग्रेनेड हमले में मारे गए।
2002 –  6 अगस्त  : पहलगाम के लिद्दर में एक शिविर पर लश्कर के आंतकी हमले में 10 श्रद्धालु मारे गए।
2015 – 29, जुलाई  : अनंतनाग में यात्रा मार्ग पर ग्रेनेड फटा, कई यात्री घायल
2016  13 जुलाई  : अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले के बाद यात्रा रोकी गई।

पिछले महीने किया था अलर्ट

26 जून 2017 को कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक ने एक बेहद गोपनीय चिट्ठी के बारे में बताते हुए महकमे को अलर्ट किया था। इस चिट्ठी में कहा गया था कि आतंकवादियों ने अमरनाथ की यात्रा में विघ्न पैदा करने की फिराक में है। वे यात्रियों पर हमला कर कम से कम 100-150 लोगों को हताहत करना चाहते हैं। इस चिट्ठी में पुलिस के जवानों-अफसरों को भी बड़े पैमाने पर निशाना बनाने की बात की गई है। चिट्ठी में कहा गया था कि ऐसे हमले से देशभर में सांप्रदायिक दंगे शुरू हो जाएंगे और इससे देश विरोधी तत्वों को फायदा होगा।