shweta kumari
पूर्णिया (बिहार).जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर रामपुर पंचायत के डलिया घाट गांव के अजय महतो की बेटी श्वेता कुमारी ने इंटर कला की परीक्षा में जिले में टॉप किया है। श्वेता के पिता मजदूर हैं। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बहुत अच्छी पढ़ाई की सुविधा बेटी को दे पाते। इसलिए मां बॉबी देवी ने मदद करने की ठानी। श्वेता की मां सिलाई-कढ़ाई कर पैसे जुटाती थी, तब पढ़ाई के लिए पैसे निकलते थे। कई बार तो इतने पैसे भी नहीं होते थे कि बेटी घर से 15 किमी दूर रानीपत्रा स्थित जीसीएस कॉलेज और कोचिंग सेंटर का किराया देकर जा सके। सूनसान रास्ते पर अक्सर पैदल ही चली जाती थी। जबतक वह वापस नहीं आती थी, माता-पिता परेशान रहते थे। सबसे दिक्कत ठंड के मौसम में होती थी जब कुहासा रहने के बावजूद भी श्वेता जिद कर पढ़ने जाती थी। जबकि जनवरी-फरवरी में कुहासे के कारण एक हाथ की दूरी पर भी दिखाई नहीं देता है।

मां का है ये कहना

बॉबी देवी बताती हैं कि श्वेता के पिता छोटे-मोटे किसान हैं। खेतीबाड़ी नहीं करते तो मजदूरी कर लेते हैं। लेकिन उनके काम से इतने पैसे नहीं मिल पाते थे कि श्वेता की पढ़ाई का खर्च निकले। इसलिए मैंने सिलाई-कढ़ाई का काम शुरू किया। मैं जब भी काम करके थक जाती थी, तब श्वेता मेरी मदद करती थी। देर रात तक मेरी मदद करने के बाद बिजली नहीं रहने के बावजूद वह सुबह चार बजे से ही अपनी पढ़ाई करती थी। उसे पूरा विश्वास था कि अच्छा नंबर आएगा। क्योंकि वह जिस कोचिंग में पढ़ती थी वहां हर टेस्ट में उसके शत-प्रतिशत अंक आते थे। हालांकि अभी तक हम उस कोचिंग के 1600 रुपए नहीं दे पाए हैं।
लोग पापा से कहते थे कि पढ़ने के लिए बेटी को इतनी दूर मत भेजो, लेकिन हम दोनों ही नहीं माने: श्वेता
मैं पढ़कर टीचर बनना चाहती हूं। ताकि मेरे इलाके के पिछड़े समाज को शिक्षित कर सकूं। जो छात्राएं कॉलेज, स्कूल और कोचिंग नहीं जा पाने के कारण पढ़ाई नहीं कर पाती, उन्हें पढ़ाना चाहती हूं। मेरी कई सहेलियां मैट्रिक में अच्छे स्कूल और कोचिंग में पढ़ाई न कर पाने के कारण फेल हो गईं। दोबारा पढ़ाई नहीं कर पाईं। मैंने अपनी जिद और मां की बदौलत ही पढ़ाई कर पाई। मुझे मैट्रिक में 68% और इंटर आर्ट्स में 77.8% अंक प्राप्त हुए। मैं जब पढ़ने जाती थी तब पापा को गांव के लोग कहते थे कि लड़की है, अकेले उतना दूर पढ़ने मत भेजो, कोई अनहोनी हो जाएगी। सब मेरी भी शादी कराने के लिए कहते थे। लेकिन मैं और मेरे मम्मी-पापा ने हिम्मत नहीं हारी।

जिस पिछड़े इलाके में कोई नहीं आता था, अब लगा है तांता

जिस पिछड़े क्षेत्र में कभी कोई जनप्रतिनिधि आता नहीं था, वे पिछले दो दिनों से श्वेता के घर पहुंच रहे हैं। भाजपा जिला मंत्री अंगद मंडल और रामपुर पंचायत के मुखिया राजेंद्र उरांव ने श्वेता से मिलकर पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।