Kailash mansarovar yatra
कैलाश मानसरोवर की सबसे मुश्किल यात्रा शुरू हो गई है। हिंदुओं के लिए कैलाश मानसरोवर का मतलब भगवान का साक्षात दर्शन करना है।

नाथुला के जरिए मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की राह चीन ने रोक दी है। चीन ने 50 यात्रियों के पहले जत्थे के लिए गेट खोलने से इंकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नाथुला के जरिए कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को कुछ कठिनाई हो रही है। इस मामले को चीन के साथ उठाया जा रहा है। माना जा रहा है कि आपसी संबंधों में आई कड़वाहट के चलते चीन ने जानबूझकर बाधा खड़ी की है। करीब एक सप्ताह इंतजार करने के बाद यात्री शेरथांग और गंगटोक वापस आ गए हैं। सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलांग ने इस मामले को गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सामने उठाया है।

वर्ष 2015 में खोला गया था रास्ता

गौरतलब है कि नाथुला का रास्ता भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए वर्ष 2015 में खोला गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निजी रुचि के चलते यह रास्ता खोला गया था। इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों की बेहतरी का संकेत माना जा रहा था। नाथुला के रास्ते प्रवेश करने के बाद तीर्थयात्रियों को चीनी परिवहन के जरिए कैलाश मानसरोवर ले जाया जाता है।

कई मुद्दों पर तनातनी

बीते दिनों कई मुद्दों को लेकर भारत चीन के रिश्तों में तनातनी देखी गई है। एनएसजी की सदस्यता के मसले पर चीन भारत की राह में रोड़ा पैदा कर रहा है। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के मुद्दे पर चीन ने कई बार संयुक्त राष्ट्र में वीटो का प्रयोग करके भारत की कोशिशों को ध्वस्त किया है। चीन – पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर दोनों देशों में विवाद है। चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना का भी भारत विरोध कर रहा है। भारत ने इस मसले पर चीन में आयोजित बैठक का भी बहिष्कार किया था। अरुणाचल प्रदेश में पवित्र धर्म गुरु दलाईलामा की यात्रा को लेकर भी चीन ने विरोध जताया था। अरुणाचल के कई जिलों का नामकरण नए सिरे से करके चीन ने अपना सांकेतिक विरोध जताया था।