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भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए रविवार को सुल्तानगंज अजगैबीनाथ घाट और अन्य घाटों से करीब 80 हजार कांवरियों ने जल उठाया। इनमें महिला कावंरियों की भी काफी संख्या थी। (photo source : bhadainitimes.in)

भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए रविवार को सुल्तानगंज अजगैबीनाथ घाट और अन्य घाटों से करीब 80 हजार कांवरियों ने जल उठाया। इनमें महिला कावंरियों की भी काफी संख्या थी। सुल्तानगंज के विभिन्न घाटों से 76 हजार 320 सामान्य कांवरियों ने जल उठाया। इनमें 21 हजार 600 महिला कांविरयां थीं। हालांकि, डाक बमों की संख्या अपेक्षा से कम रही।

रविवार को 3509 डाक कांवरियों ने जल उठाया। इनमें 126 महिला डाक कांवरियां थीं। नियंत्रण कक्ष के सामने ही रजिस्ट्रेशन केन्द्र बनाया गया था, जहां पांच से ज्यादा काउंटर बनाए गए थे। लेकिन दोपहर तीन बजे तक काउंटर पर कांवरियों की संख्या काफी कम रह गई थी। ज्यादातर डाक कांवरिया दोपहर दो बजे तक जल उठाकर देवघर के लिए निकल चुके थे।

कांवरियों का जल उठाने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। घाट किनारे कई जगहों पर पंडे कांवरियों को संकल्प कराते नजर आए। जहाज घाट केन्द्र पर डाक कांवरियों की भीड़ अपेक्षाकृत कम थी। पर्ची पानी में भींगे नहीं, इसके लिए केन्द्र के पास ही लेमिनेशन करने की भी व्यवस्था की गई थी। डाक कांवरियों के अलावा सामान्य कांवरियों की भी भीड़ लगी रही। कोई अकेले तो कोई परिवार संग और कोई गांव व मोहल्लों से जत्थे में जल उठाने आया था। जल उठाने के साथ बोल बम और जय भोले बाबा का घोष करते हुए कांवरिये आगे बढ़ रहे थे। रायपुर मध्यप्रदेश, प. बंगाल, उड़ीसा, नेपाल सहित पटना, अरवल, वैशाली, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा और आसपास के जिलों के कांवरिये जल उठाने पहुंचे थे।

सावन की पहली सोमवारी को देवघर में बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए रविवार को सुल्तानगंज से जल उठाने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी नई सीढ़ी घाट के दाहिने हिस्से में जल उठाने में हो रही थी। यह पूरा हिस्सा कीचड़ से सना हुआ था और इस वजह से वहां काफी फिसलन थी। हालत यह थी कि कांविरये गिरते-फिसलते किसी तरह जल उठा रहे थे। गंगा स्नान करने जाने में भी यही परेशानी हो रही थी।

स्नान करने और जल उठाने के बाद कावंरिये एक-दूसरे का हाथ थामे धीरे-धीरे ऊपर आ रहे थे ताकि गिर नहीं पड़ें। घाट पर बालू की बोरियां बिछाई गई थीं लेकिन जलस्तर बढ़ने के कारण कई स्थानों पर बोरियां डूब गई थीं। इस वजह से ठीक गंगा के किनारे पानी की गहराई का पता नहीं चल पा रहा था। अजगैबीनाथ मंदिर जाने के लिए घाट के पास से बनी सड़क के दाहिनी ओर एक बड़े हिस्से में यही स्थित थी। जहां कांवरियों को पंडे संकल्प दिला रहे थे, उसके ठीक आगे से ही बैरिकेडिंग तक कीचड़युक्त जमीन और फिसलन से होकर गुजरना पड़ रहा था। इस बार बांस की बल्लियों की जगह लकड़ी के पाट से बैरिकेडिंग की गई है। लेकिन गंगा के जलस्तर में वृद्ध के कारण बैरिकेडिंग एक जगह स्थिर रखने में परेशानी हो सकती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि शनिवार को जहां बैरिकेडिंग की गई थी, रविवार को वहां ज्यादा पानी हो जाने के कारण कांवरियों को स्नान करने में दिक्कत हो रही थी। हालांकि बैरिकेडिंग से सटे ही एसडीआरएफ सहित स्थानीय नाव सुरक्षा के तौर पर तैनात की गई थीं।