बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को आजतक के स्टिंग ‘उड़ता बिहार’ पर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा, “सबसे पहले आप लोगों ने जगह-जगह स्टिंग करके लोगों से बात किया इसके लिए हम धन्यवाद देते हैं. क्योंकि यह मीडिया का काम बाद में बहुत काम आता है. कुछ चैनल ने कैसे किया कि शराब कहां-कहां मिलता रहा है. उससे कुछ कठोर कार्रवाई हुई उसका फायदा मिलता है.”

उन्होंने आगे कहा, “आप इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि शराबबंदी के बाद अन्य मादक पदार्थों का सेवन बढ़ गया है तो मै समझता हूं कि यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है. याद रखिए अप्रैल 2016 से लगातार हम इस बारे में आगाह कर रहे हैं. जब हम जनसभाओं को संबोधित करते हैं तो और खास कर महिलाओं को आह्वान करते हैं तो उस क्लिप को देख लें तो कोई ऐसा संबोधन हो जिसमें इसका जिक्र ना हो.”

मादक पदार्थों के लिए डी एडिक्शन सेंटर को हम लोगों ने इंप्रूव किया. 21 जनवरी से 22 मार्च तक हमारा कैम्पेन था शराबबंदी से नसाबंदी की ओर और सिर्फ शराबबंदी नहीं नशाबंदी की बात की गई है, गाने के माध्यम से… नाटक के माध्यम से. 21 जनवरी 2017 को 4 करोड़ लोग नशामुक्ति के मानव श्रृंखला में शामिल हुए हैं तो आप समझ सकते हैं कि एक तिहाई से ज्यादा लोग अगर नशामुक्ति में शामिल होते तो यह जनभावना है. समाज में कई ऐसे लोग होते हैं कि जो नशा के शिकार होते हैं वैसे लोग तो समाज में हैं यह खत्म करने का दावा करते हैं तो वो गलत हैं.

इस मामले में हम लोगों की मीटिंग हुई है जिसमें पुलिस के लोग, एक्साईज डिमार्टमेंट के लोग, एनसीबी, डीआरआई, एसएसबी के लोग शामिल हुए. इसमें बहुत सारे निर्णय हुए हैं हमारे यहां एआईयू है वो इस काम को देखता है उनके कोआर्डिनेशन के जरिए, इनके जो सेंटर हैं लोग जानते है कि गांजा कहां-कहां क्या करता है. गांजा को अब रिफाईन करने लगे हैं. कौन करता है उन सभी जगहों पर संयुक्त अभियान के तहत कार्रवाई चलेगी. और यही नहीं है हम जितनी भी कार्रवाई करें वो एक पहलू है सबसे व्यापक पहलू है जनचेतना. वो निरंतर हम लोगों का चलेगा. चंपारण को लेकर बापू का जो कार्यक्रम चला रहे हैं उसका ये अभिन्न अंग है. हर जगह इस बात की चर्चा होगी. सिर्फ शराबबंदी का नहीं नशाबंदी का कितना नुकसान पहुंचाएगा, वाइटनर, इंजेक्शन टाइप का पी लेता है ऐसी-ऐसी चीजों का लोग सेवन कर लेते हैं.

video

मैं तो आप लोगों से प्रार्थना करूंगा कि जनता को ये जरूर कहिए कि ये बुरी चीज है ये भी कहिए. एक बात हम कहेंगे हमको तो मालूम भी नहीं था, हमने देखा भी नहीं था. दिल्ली में उतर रहे हैं तब आपके बिहार भवन में तब खड़े. अरे भाई ये सब क्यों करते हैं? जानते हैं कि हम बात करते है तो इतमिनान से करते हैं हमारा विश्वास बाइट में नही है हमारा विश्वास फुल डाइट में है.