भागलपुर, यहां मनोरमा देवी की बहू प्रिया उनके सपनों को आगे बढ़ा रही हैं। दरअसल, मनोरमा देवी ने घर-परिवार और समाज की बेड़ियों को तोड़ते हुए एक एनजीओ `सृजन` की स्थापना की थी। उन्होंने महिला उत्थान को अपना मकसद बनाया। अब इस एनजीओ से 10 हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं हुईं हैं। मेक इन इंडिया का उम्दा प्लेटफॉर्म है `सृजन`.

बता दें कि मनोरमा देवी अब नहीं रहीं, लेकिन उनके सृजन की गति बरकरार है। उन्होंने अपने जीवन काल में ही बहू प्रिया कुमार को सृजन को कैसे आगे बढ़ाना है,इस की जिम्मेदारी सौंप दी थी। प्रिया कुमार कहती हैं- सृजन के लिए मां की सेवा को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नयी सोच और विजन से सृजन को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अब मेरे कंधों पर आयी है, तो मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगी। प्रिया कुमार ने कहा कि मनोरमा देवी के लगाए इस वृक्ष को कभी सूखने नहीं दूंगी। मां द्वारा तैयार किया गया सृजन ही अब मेरा लक्ष्य है। सुखद-सुरक्षित भविष्य के लिए सृजन में नये-नये सृजनहार गढ़े जा रहे हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि अपने हुनर के बूते तमाम महिलाएं आने वाली पीढ़ियों को भी सबल बनाएंगी।

मनोरमा देवी ने आत्मविश्वास पैदा किया
प्रिया कुमार कहती हैं- मां मनोराम देवी ने हर वर्ग की महिलाओं को खुद को साबित करने का बड़ा व बेहतर प्लेटफार्म तैयार किया है। उन्होंने भागलपुर व आसपास के हजारों परिवारों को जीने का सहारा दिया। आत्मनिर्भर होकर सृजन की महिलाओं ने शिक्षा और समझदारी विकसित की, फिर खुद पर विश्वास करना सीखा।
 
मेक इन इंडिया का उम्दा प्लेटफार्म
कुशल गृहिणी से लेकर सफल व्यवसायी बनाने के महत्वाकांक्षी मकसद में जुटे सृजन केंद्र को मेक इन इंडिया का उम्दा प्लेटफार्म कहा जा सकता है। यहां सुबह-सबेरे से सैकड़ों महिलाएं टोलियों में पहुंचती हैं। हर टोली अपनी खास पहचान के साथ अपने नियत प्रोडक्ट की रचना-उत्पति में मशगूल हो जाती है। गांव की कमजोर तबके की महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को उन्नत करने की परिकल्पना को 400 से अधिक स्वयं सहायता समूहों के जरिये साकार किया जा रहा है।
अब बिहार के बाहर मार्केटिंग पर जाेर
प्रिया कुमार कहती हैं-सृजन के उत्पाद की बहुत मांग है। हम गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते। बावजूद इसके हम अपने उत्पादों की अच्छी मार्केटिंग अब तक नहीं कर पाये। आगे हमारा ध्यान इसी ओर है और भविष्य में संस्थान को स्पेशलाइज्ड ब्रांड के साथ मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के तौर पर बिहार से बाहर भी ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रिया कहती हैं कि नये ट्रेंड के हिसाब से सृजन की महिलाओं को और अधिक उत्पादों के निर्माण से जोड़ने का प्रयास कर रही हूं। मार्केटिंग के साथ ही ट्रेनिंग पर भी पूरा फोकस है। प्रिया के मुताबिक सृजन एक स्वयंसेसी संस्था है। इसने आज तक सरकार से किसी तरह की मदद या सब्सिडी नहीं ली है। प्रिया कुमार कहती हैं, पति अमित कुमार मेरी ताकत हैं और सासू मां मनोरमा देवी हमेशा से मेरे लिये प्रेरणा स्रोत रहेंगी।