DR Sunita
डॉ सुनीता उन बच्चों को ममता की छांव देने में जुट गईं। वैसे बच्चे, जिन्हें उनका परिवार या मां स्टेशन, ट्रेन, सड़क, झाड़ियों व अन्य स्थानों पर लावारिस छोड़ जाता है। उन्हें 7 वर्षों में अब तक ऐसे 726 बच्चे मिले। इनमें 46 नवजात शामिल हैं।

आरा जिला की सुनीता की वर्ष 2006 में शादी हुई और परमात्मा की कृपा से 2007 में पहली बार मां बनने वाली थी। पर नौ माह का शिशु गर्भ में मर गया। सुनीता अंदर से टूट गई। डिप्रेशन में चली गई। बाद में परिचितों के हौसला बढ़ाने पर नॉर्मल हुईं। फिर वर्ष 2010 से वे दूसरे बच्चों को ममता की छांव देने में जुट गईं। वैसे बच्चे, जिन्हें उनका परिवार या मां स्टेशन, ट्रेन, सड़क, झाड़ियों व अन्य स्थानों पर लावारिस छोड़ जाता है। उन्हें 7 वर्षों में अब तक ऐसे 726 बच्चे मिले। इनमें 46 नवजात शामिल हैं।

– सुनीता ऐसे बच्चों को उनका आशियाना दिलाती हैं। इनमें कई बच्चों को निसंतान दम्पतियों ने गोद लिया है। ऐसे बच्चे पढ़ भी रहे हैं। डॉ. सुनीता सिंह आरा शहर के चंदवा हाउसिंग कॉलोनी की हैं। वे कुमुद सिंह की पत्नी हैं।
– बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष हैं। आरा शहर में ज्यूडिसियल बेंच बाल कल्याण समिति वर्ष 2010 से है। पहली बार अध्यक्ष की जिम्मेदारी डॉ. सुनिता सिंह ने ही संभाली।

डॉ. सुनीता बोलीं- हर बच्चे में देखती हूं अपनी संतान, बन गई सम्पूर्ण मां

– डॉ. कुमारी सुनीता सिंह कहती हैं, मुझे हर बच्चे में अपनी संतान दिखती है। बच्चे कहां किसी को पहचानते हैं। उन्हें बस मां का आंचल चाहिए। कोख में संतान खोने का दर्द व कुंठा को सहन करना मुश्किल था। मैं डिप्रेशन में जाने लगी। 2010 में बाल कल्याण समिति के बारे में सुना। मित्रों ने फॉर्म भरवा दिया और मैं इससे जुड़ गई। सैकड़ों बेसहारा बच्चों का जीवन संवारकर अब सम्पूर्ण मां का अहसास होता है।

क्या है बाल कल्याण समिति कैसे लें बच्चे को गोद?

– राज्य सरकार के अधीन बाल कल्याण समिति एक ज्यूडिसियल बेंच है। अध्यक्ष डॉ. सुनीता के अलावे दो सदस्य सुधा शंकर तिवारी व अवधेश कुमार हैं। बाल कल्याण समिति नवजात से 18 वर्ष तक के भटके या लावारिस बच्चों को रिकवर करता हैं। उन्हें किसी दम्पती को गोद देने की कोशिश की जाती है। जिसमें 1 साल तक लग जाता है।